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वाराणसी। श्रृंगार गौरी मामले में सिविल जज सीनियर डिवीजन रवि कुमार दिवाकर की अदालत ने मंगलवार को कमीशन की कार्रवाई ईद के बाद करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही अदालत ने कहा है कि कमीशन की कार्रवाई की रिपोर्ट आगामी 10 मई को पेश की जाए। गौरतलब है कि इससे पहले 20 अप्रैल को अदालत ने श्रृंगार गौरी मामले में दोनों पक्षों और अंजुमन इंतजामिया मस्जिद की दलीलें सुनने के बाद आदेश के लिए 26 अप्रैल की तिथि नियत की थी।

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काशी विश्वनाथ मंदिर-ज्ञानवापी परिसर स्थित श्रृंगार गौरी और अन्य विग्रह देवताओं का वकील कमिश्नर से सर्वे कराने के मामले में डीजीसी सिविल की आपत्ति पर वादीपक्ष की तरफ से बीते 20 अप्रैल को दलीलें सिविल जज सीनियर डिवीजन रवि कुमार दिवाकर की कोर्ट में पेश की गई थी। अदालत ने दोनों पक्षों और अंजुमन इंतजामिया मस्जिद का पक्ष सुनने के बाद आदेश के लिए 26 अप्रैल की तिथि नियत कर दी थी।

आवेदन को निरस्त करने की हुई थी मांग

वादी पक्ष के अधिवक्ता सुधीर त्रिपाठी व सुभाष नंदन चतुवेर्दी ने डीजीसी सिविल के आवेदन को निरस्त करने, मां श्रृंगार गौरी और मंदिर के विग्रह देवताओं नंदी जी व हनुमान जी महाराज का स्थान, तहखाना और बैरिकेडिंग के अंदर मंदिर से संबंधित समस्त साक्ष्य जो वादी गण द्वारा बताए जाए और दिखाया जाए, उसकी कमीशन कार्रवाई वीडियोग्राफी एवं फोटो में प्रतिवादीगण के सहयोग करने और बाधा न उत्पन्न करने का आदेश दिए जाने का अनुरोध किया गया था।

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साक्ष्य सामने नहीं आने देना चाहते हैं प्रतिवादी

साथ ही, कमीशन कार्रवाई में राखी सिंह समेत वादी पक्ष के लोग, 15 वकीलों और 3 वीडियोग्राफर के शामिल होने की बात कही गई थी। आपत्ति में कहा गया था कि वकील कमिश्नर या अन्य को बैरिकेडिंग अंदर कमीशन की कार्रवाई पर रोक लगाने, कानून व्यवस्था की स्थिति खराब होने जैसी बात कहकर न्यायालय व न्याय को भी स्पष्ट न्याय करने से रोकने व असहयोग जैसी धमकी है। यह भी कहा गया था कि प्रतिवादी खुल्लमखुल्ला बाधा उत्पन्न कर रहे हैं और साक्ष्य सामने नहीं आने देना चाहते हैं।

वीडियोग्राफी से बताया था सुरक्षा को खतरा

साथ ही, प्रतिवादियों को फायदा देने के उद्देश्य से आवेदन देने का आरोप लगाया गया था। रेड जोन में वीडियोग्राफी से सुरक्षा को खतरा बताया गया था, लेकिन यह स्पष्ट नही किया गया था कि किससे खतरा है। यूपी स्टेट की तरफ से डीजीसी सिविल महेंद्र कुमार पांडेय व डीजीसी फौजदारी आलोक चन्द्र शुक्ल ने पक्ष रखा था। अंजुमन इंतजामिया मस्जिद कमेटी की तरफ से अधिवक्ता अभय यादव ने कमीशन की कार्रवाई जिस आराजी नंबर के बाबत कही गई है, उसकी चैहद्दी और रकवा स्पष्ट नहीं होने पर सवाल उठाया था।

रिपोर्ट – रवि प्रकाश सिंह

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