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वाराणसी। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में छात्रसंघ चुनाव को लेकर विवाद गहराता चला रहा है। महामंत्री पद पर टाई हुए मुकाबले को लेकर विद्यापीठ प्रशासन की ओर से लिया गया निर्णय अब उसके ही गले की हड्डी बन चुका है। मामले को लेकर दोनों तरफ से आरोप-प्रत्यारोप के दौर जारी है। मंगलवार को भी इसको लेकर विश्वविद्यालय में हंगामा हुआ।

आरोप है कि छात्रों ने विश्वविद्यालय में कार्य कर रही एजेंसी के कार्यालय के अंदर घुसकर तोड़फोड़ की और एजेंसी संचालक को डरा-धमका कर जबरदस्ती चुनाव में गड़बड़ी संबंधी शपथ पत्र लिखवाया। वहीं दूसरी तरफ छात्रों ने भी वीडियो और शपथ पत्र जारी करते हुए वीसी सहित चुनाव अधिकारी व एजेंसी संचालक पर गंभीर आरोप लगाये। बहरहाल सच्चाई क्या है इसको लेकर अभी संस्पेस बरकरार है, लेकिन छात्र मामले को लेकर हाईकोर्ट में जाने की तैयारी में है।

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विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रों के आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि छात्रों ने दबंगई के बल पर न सिर्फ एजेंसी कार्यालय में घुसकर मारपीट की, बल्कि एजेंसी संचालक प्रदीप शुक्ला से जबदरदस्ती एफिडेविट भी लिखवाया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस संबंध में एजेंसी संचालक का शपथ पत्र भी जारी किया। शपथ पत्र में एजेंसी संचालक ने कहा कि छात्रसंघ चुनाव में किसी प्रकार की कोई गड़बड़ी नहीं हुई। वीसी पर लगाये गये आरोप गलत व निराधार है। आरोप पत्र से वीसी और एजेंसी का कोई लेना-देना नहीं।

होगी कार्रवाई

छात्रसंघ पदाधिकारियों ने पत्र जारी करते हुए परिसर का माहौल खराब करने और उपद्रवी छात्रों के विरूद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है। छात्रों ने सभी उपद्रवी छात्रों के निष्कासन की मांग की है।

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इस संबंध में चीफ प्राक्टर प्रो. निरंजन सहाय का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में शामिल एजेंसी द्वारा स्टैम्प पेपर पर उपलब्ध कराए गए हलफनामें में यह दावा किया गया कि महामंत्री प्रत्याशी प्रभु पटेल के नेतृत्त्व में तकरीबन पचास लड़के आए और जबरदस्ती लिखवाया कि चुनाव में धांधली हुई है। उक्त पत्र के आलोक में सिगरा थाने में कारवाई हेतु विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से आग्रह किया गया है। परिसर की शांति भंग करने वाले लोगों पर विधिक कारवाई की जा रही है।

रिपोर्ट – मनोज कुमार गुप्ता

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